शांत रहना (Keeping Quiet)

Aryan ChaudharyAryan Chaudhary
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अब हम बारह तक गिनेंगे

और सब शांत रहेंगे।

एक बार पृथ्वी के चेहरे पर,

चलो किसी भी भाषा में न बोलें,

एक क्षण के लिए रुक जाएँ,

और अपनी बाहें अधिक न हिलाएँ।

यह एक अनोखा पल होगा,

बिना भागदौड़, बिना इंजनों के,

हम सभी एक साथ होंगे

एक अचानक आई अजीब सी शांति में।

ठंडे समुद्र में मछुआरे

व्हेल को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे,

और नमक इकट्ठा करने वाला आदमी

अपनी घायल हाथों को देखेंगे

जो लोग हरियाली को युद्ध में बदलते हैं,

गैस के युद्ध, आग के युद्ध,

ऐसी जीत जिसमें कोई जीवित न बचे,

वे स्वच्छ वस्त्र पहनेंगे

और अपने भाइयों के साथ

छाया में बिना कुछ किए चलेंगे।

जो मैं चाहता हूँ, उसे

पूर्ण निष्क्रियता से न जोड़ें।

यह जीवन के बारे में है;

मेरा मृत्यु से कोई संबंध नहीं।

यदि हम अपने जीवन को

चलाते रहने के विचार में इतने एकतरफा न होते,

और एक बार कुछ भी न करते,

शायद एक गहरी शांति

इस दुःख को रोक सकती

जो हमें स्वयं को न समझने का है,

और जो हमें मृत्यु से डराता है,

शायद पृथ्वी हमें सिखा सकती है

जिस तरह जब सबकुछ मृत सा लगता है,

और फिर जीवित साबित होता है।

अब मैं बारह तक गिनूंगा,

तुम शांत रहना, और मैं चला जाऊँगा।

—पाब्लो नेरुदा

पाब्लो नेरूदा की कविता "शांत रहना" हमें आत्मचिंतन, शांति और मानवता के बीच सामंजस्य की गहरी सीख देती है। यह कविता सिर्फ मौन रहने की बात नहीं करती, बल्कि हमें हमारे अस्तित्व, हमारे कार्यों और उनके प्रभावों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

शांति और आत्मचिंतन की शक्ति

कवि शुरुआत में हमसे कहता है कि हम सब एक पल के लिए रुकें, कोई भी भाषा न बोलें और पूर्ण मौन में रहें। यह एक ऐसा क्षण होगा जहाँ कोई जल्दबाज़ी नहीं होगी, कोई मशीनें नहीं चलेंगी, और हम सभी एक नई अनुभूति में होंगे। यह मौन हमें आत्मनिरीक्षण का अवसर देगा, जिससे हम अपनी ज़िंदगी की भागदौड़ और अस्त-व्यस्तता पर विचार कर सकें।

मानवता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता

कवि उन मछुआरों की कल्पना करता है जो ठंडे समुद्र में व्हेल का शिकार करते हैं, लेकिन अगर वे एक क्षण के लिए रुकें, तो वे इस निर्दयता को समझ सकते हैं। इसी तरह, नमक इकट्ठा करने वाले श्रमिक अपने घायल हाथों को देख सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि वे अपने जीवन में कितनी पीड़ा सह रहे हैं। यह प्रतीकात्मक रूप से उन सभी लोगों के लिए एक संदेश है जो अपने कर्मों से दूसरों और स्वयं को नुकसान पहुँचा रहे हैं—यदि वे एक पल ठहरें और सोचें, तो वे एक नई दिशा में बढ़ सकते हैं।

युद्ध और हिंसा से दूर रहने की प्रेरणा

कवि उन लोगों की भी बात करता है जो युद्ध और विनाश में लगे हैं—चाहे वह जैविक युद्ध हो, परमाणु युद्ध हो, या किसी भी प्रकार का हिंसक संघर्ष। वह चाहता है कि वे भी इस मौन में भाग लें, अपने हथियारों को छोड़ दें, और अपने भाइयों के साथ शांति की छाया में बैठें। यह एक शक्तिशाली संदेश है कि युद्ध और संघर्ष में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता, क्योंकि अंततः सभी को नुकसान होता है।

जीवन का महत्त्व और निष्क्रियता की गलतफहमी

नेरूदा स्पष्ट करते हैं कि वह हमें पूरी तरह निष्क्रिय रहने के लिए नहीं कह रहे। उनका उद्देश्य मृत्यु का नहीं, बल्कि जीवन का समर्थन करना है। वे चाहते हैं कि हम अपने अस्तित्व को समझें और जीवन को केवल गति देने के लिए न जिएँ, बल्कि इसके मूल उद्देश्य को भी पहचानें।

मौन और शांति का गहरा प्रभाव

यदि हम हमेशा बस चलते रहने और व्यस्त रहने में ही लगे रहेंगे, तो हम कभी भी खुद को, अपने दुःखों, अपनी खुशियों, और अपने जीवन के असली अर्थ को नहीं समझ पाएंगे। कवि मानते हैं कि एक बड़ा मौन हमारी उदासी और जीवन के संघर्षों को रोक सकता है, क्योंकि यह हमें खुद को बेहतर समझने का अवसर देगा।

प्रकृति से सीखने की प्रेरणा

कवि अंत में पृथ्वी से सीखने की बात करता है। जिस तरह पेड़-पौधे और प्रकृति का चक्र चलता है—जहाँ हर पतझड़ के बाद बसंत आता है, और मृत प्रतीत होने वाली चीजें फिर से जीवित हो जाती हैं—उसी तरह हमें भी यह समझना चाहिए कि हर ठहराव का अर्थ अंत नहीं होता। यह एक नया आरंभ हो सकता है।

कवि का अंतिम संदेश

कविता के अंत में, कवि हमें फिर से मौन में जाने और आत्मचिंतन करने के लिए कहता है। वह खुद चला जाता है, लेकिन हमें यह सीख देकर जाता है कि शांति और आत्मनिरीक्षण ही वह मार्ग है जो हमें वास्तविक आनंद, समझ और संतुलन की ओर ले जा सकता है।

कविता से प्रेरणा और जीवन में इसकी प्रासंगिकता

"शांत रहना" सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि जीवन का एक दर्शन है। यह हमें सिखाती है कि कभी-कभी, हमें दौड़ने से ज्यादा ठहरने की जरूरत होती है। अगर हम अपने जीवन में एक क्षण के लिए रुकें, अपने कर्मों को देखें, अपने मन को शांत करें और शांति को महसूस करें, तो हम खुद को और इस दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति जीवन की भागदौड़, तनाव, या संघर्षों से जूझ रहा है, तो यह कविता उसे यह एहसास कराती है कि ठहराव कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबोध का अवसर है। शांति और आत्मचिंतन के माध्यम से हम अपने भीतर एक नई ऊर्जा और प्रेरणा पा सकते हैं, जो हमें जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी।

इसलिए, कभी-कभी बस "शांत रहना" ही सबसे बड़ी ताकत होती है

छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

पाब्लो नेरूदा की कविता "शांत रहना" न केवल जीवन के बारे में एक गहरा संदेश देती है, बल्कि यह खासतौर पर उन छात्रों और युवाओं के लिए भी बहुत प्रासंगिक है, जो परीक्षा के दबाव, भविष्य की चिंताओं और डिग्री की अंधी दौड़ में उलझे हुए हैं।

भागदौड़ से बाहर निकलो और खुद को समझो

आज की शिक्षा प्रणाली और समाज हमें लगातार भागने के लिए प्रेरित करता है—अच्छे नंबर लाने के लिए, एक प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए, और फिर एक अच्छी नौकरी के लिए। लेकिन इस दौड़ में हम खुद को भूल जाते हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि कभी-कभी रुकना ज़रूरी होता है। अगर हम हमेशा सिर्फ आगे बढ़ने की ही सोचेंगे, तो कभी खुद को समझ ही नहीं पाएंगे।

डिग्री नहीं, ज्ञान ज़रूरी है

बहुत से छात्र सिर्फ अच्छे अंक लाने और डिग्री हासिल करने के पीछे भागते हैं, लेकिन असली शिक्षा अंकों से नहीं, बल्कि ज्ञान से आती है। जब हम बिना समझे सिर्फ रटने की कोशिश करते हैं, तो यह एक बोझ बन जाता है, और यही बोझ हमें तनाव और डिप्रेशन की ओर धकेलता है। इस कविता का संदेश है कि हमें अपनी शिक्षा को गहराई से समझना चाहिए, न कि सिर्फ नंबरों की चिंता करनी चाहिए।

तनाव और अवसाद से बाहर निकलो

परीक्षाओं का डर, माता-पिता की उम्मीदें, भविष्य की अनिश्चितता—ये सभी चीज़ें युवाओं को मानसिक रूप से परेशान कर सकती हैं। लेकिन यह कविता हमें सिखाती है कि अगर हम एक पल के लिए शांत होकर सोचें, तो हम पाएंगे कि ज़िंदगी सिर्फ इन चीज़ों तक सीमित नहीं है। असफलता भी सीखने का एक हिस्सा है। ज़रूरी यह है कि हम खुद को पहचानें और मानसिक शांति बनाए रखें।

मौन और आत्मचिंतन से समाधान मिलेंगे

नेरूदा हमें बताना चाहते हैं कि जब हम भागदौड़ से बाहर निकलकर एक क्षण के लिए मौन में जाते हैं, तो हमें अपने जीवन के सवालों के जवाब खुद मिल जाते हैं। यदि हम जीवन के असली उद्देश्य को समझेंगे, तो परीक्षा के नंबर, समाज की उम्मीदें और भविष्य की चिंताएँ हमें उतनी नहीं डराएंगी।

छात्रों के लिए एक जरूरी संदेश

अगर आप भी परीक्षा के दबाव, करियर की चिंता या किसी अन्य मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो एक पल के लिए शांत रहो। अपने विचारों को सुनो, अपने डर को पहचानो और खुद से पूछो—क्या मैं सिर्फ दौड़ रहा हूँ या वाकई कुछ सीख भी रहा हूँ?

अगर हम एक बार रुककर आत्मचिंतन करें, तो हम जीवन को एक नई रोशनी में देख सकते हैं। सफलता सिर्फ तेज़ दौड़ने में नहीं, बल्कि सही दिशा में बढ़ने में है। इसलिए, कभी-कभी शांत रहना ही सबसे बड़ी ताकत होती है!

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Aryan Chaudhary
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